Agriculture

 

 

 

Arable’s products are based on research by sons of farmer in guidance of Famous Innovator international awardee Sh. Ishwar Singh Kundu

Basic ingredients/herbs used to formulate/manufacturing of our all products.
Neem seed,leaf [Azadirachta],Extract of Haldi [ Termric  ]
Amba Haldi ,Reetha [Sapindus mukarossi],Neem leaf &seed exract{Azadirachta indica},Haridra {Terminalia chebularetz},Amla[Emblica officinals],Baheda {Terntinalia belerica},Aak/Ankra ,Karanja Oil,Mirch booti [Chroton bonypladianm],Chirayata ,Kutki,Bawachi.etc
Note:- Herbs may be changed due to research and to make product perfect. See label.

  Note:We observed that Bio-Organic words are using by some comapnies to misguide Farmers.We do not say or use these words we only claimed that our invented products are effective when compare with synthetic or poisonous inputs.We used selected herbs,plants their extarct,asv,ark,oils etc.



Awarded and Supported By:-

Note- Our Products are Not Insecticide, fungicide or FERTILIZERS.

बीज उपचार-

बीज उपचार बेहद आवश्यक है,इससे बीज जनित रोगों से सुरक्षा मिलती है साथ ही बीज का जमाव जल्दी व् अधिसंख्य होता है.

इसके लिए हमारा उत्पाद कमाल-505-केसरी बेहद उपयोगी पाया गया है.हज़ारों किसान इससे संतुष्ट हैं. 50 किलो बीज हेतु केवल 200 ग्राम केसरी काफी होता है.

तरीका– 200 ग्राम केसरी को पहले प्लास्टिक के बर्तन में एक लीटर पानी के साथ अच्छी तरह घोल लें. फिर बीज को प्लास्टिक शीट या पक्के फर्श पर ढेर बनाएं. फिर तैयार घोल को इस  के बीज के ढेर पर डालें व् अच्छी तरह मिलाएं,जब सारा घोल बीज पर परत की तरह चढ़ जाये तो बीज को काली प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढकें,केवल 20,25 मिनट तक ढका रहने दें,इसके बाद छाया में सुखाएं,ख्याल रहे की बीज को धूप न लगे. जब अच्छी तरह सूख जाये तो बिजाई करें,सम्भव हो तो बिजाई सांयकाल के समय करें,तेज  धूप ,गर्म मौसम में बिजाई करने से बचें.

 

 


भूमि-उपचार-

किसी भी फसल की बिजाई से पूर्व भूमि उपचार का विशेष महत्व है. क्योंकि भूमि में कई तरह के रोगाणु,विषाणु,कीटों के लार्वा आदि मौजूद होते हैं जो बाद में फसलों को बहुत नुकसान पहुंचते हैं तथा कीटनाशियों आदि के खर्च के बावजूद भी उपचार नहीं हो पाता,इस तरह खर्च बढ़ जाता है व पैदावार में भी कमी आती है साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता पर भी विपरीत असर पड़ता है. अतैव भूमि का उपचार अवश्य करें.

हमारे उत्पाद भूमि उपचार हेतु बहुत सफल पाए गए हैं. यह न केवल

भू-जनित समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायक हैं अपितु भूमि में मौजूद पोषक तत्वों को भी घुलनशील अवस्था में ले आते है,इससे सभी निष्क्रिय तत्व फसलों के काम आते हैं. भूमि में जैविक प्रक्रिया आरम्भ होने से मिटटी की उर्वरा शक्ति में भी उत्तरोत्तर वृद्धि होती है.

उत्पाद-कमाल-क्लैंपकमाल-505

मात्रा- कमाल-क्लैंप 04 किलोग्राम,व कमाल-505 एक लीटर.

तरीका- बिजाई से पूर्व अंतिम जुताई के समय. दोनों उत्पादों को पहले बारीक सूखे रेत में मिलाकर भुरभुरा कर लें. फिर जो भी उर्वरक प्रयोग कर रहे हों,जैसे DAP  आदि के साथ अच्छी तरह मिलाये,फिर सारे  खेत में बुरकाव करें व् गहरी जुताई कर दें. व बिजाई कर दें.

किन्नू,अमरुद,अंजीर व अन्य सभी बागवानों ने हमारे उत्पादों को सराहा है. उपरोक्त तरिके से भूमि उपचार अगर कर दिया जाये तो आपके बागों का कायाकल्प सम्भव है. भूमि,जड़ के रोग,फफूंदी,कीट से निजात मिल जाती है. हमारे किसान मित्रों ने ऐसे बागों में लगभग सूखने की कगार पर पहुंच चुके पौधों पर यही तरीका आजमाया और जो पौधा मर रहा था,विशेषज्ञ कहते थे की यह नहीं बचेगा,उखाड़ कर नए पौधे लगाओ,सिर्फ एक सप्ताह में ही पौधों में नया फुटाव आरम्भ हो गया.


बिजाई के बाद:-

इस गेहूं की फसल को खरपतवार नाशक के स्प्रे ने लगभग समाप्त कर दिया था. कमाल-क्लैंप ने इस मर चुकी फसल को दोबारा जीवनदान दे दिया.

बिजाई  के लगभग 20 ,25 दिन का समय अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है,यह जड़ों का व् पौधे के  विकास का समय होता है. अगर इस समय सही खुराक,उपचार न मिले तो पौधों का सही विकास नहीं हो पाता व पैदावार में कमी आ जाती है.

इस समय हम नाइट्रोजन जैसे उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं,लेकिन पाया गया है की भरपूर उर्वरक आदि देने के बावजूद भी सम्पूर्ण विकास नहीं होता. इसका कारण है की भूमि में उर्वरक आदि को खुराक में बदलने की जो प्राकृतिक व्यवस्था होती है वह कमजोर है अर्थात भूमि में जैविक प्रक्रिया नहीं हो रही जो उर्वरकों को खुराक में बदल सके व  जड़ें न खुराक ग्रहण कर पाती हैं न पौधों को पोषण मिल पाता  है.

इसीलिए गहन शोध के उपरांत प्राकृतिक जड़ी बूटियों से आयुर्वेदिक सिद्धांतों का आधार लेकर ऐसे अनूठे उत्पाद कृषिको ने बनाये हैं जो इस समस्या का निवारण करने में सक्षम हैं. ये उत्पाद न केवल भूमि में उपस्थित पोषक तत्वों को सक्रिय करते हैं बल्कि आप जो भी उर्वरक [ऑर्गेनिक या इनऑर्गेनिक] हमारे उत्पादों संग मिलाकर देते हैं वह सभी पौधे आसानी से ग्रहण कर  लेते हैं. साथ ही भूमि में अगर कोई कीट या रोग के कारण  मौजूद होते हैं उनका भी समाधान हो जाता है.  भूमि में जैविक प्रक्रिया तीव्रता से विकसित होती है इससे जड़ें गहराई तक जाकर अत्यधिक,उपलब्ध पोषक तत्व ग्रहण करने में सक्षम  हो जाती हैं.

 

भूमि बेहद नरम हो जाती है,पानी सोखने व जल-धारण की क्षमता विकसित होती है. भूमि में जल व वायु का आवागमन  सुगम होता है. अर्थात भूमि में जीवन प्रक्रिया का विकास हो जाता है. हमारे उत्पादों की  विशेषता है आप इनको जैविक,कार्बनिक या रासायनिक उत्पादों संग भी प्रयोग कर सकते है.जो भी उर्वरक आदि आप हमारे उत्पादों संग मिलाकर प्रयोग करते हैं उनकी कार्यशीलता में तीव्र वृद्धि हो जाती है. इस कारण उर्वरकों आदि का खर्च भी उत्तरोत्तर कम होता जाता है. उत्पाद- कमाल –क्लैंप, मात्रा- ४ से ६ किलोग्राम प्रति एकड़. विधि क्लैंप को सम मात्रा में सूखे रेत के साथ मिलाकर बारीक व् भुरभुरा कर लें.फिर जो भी उर्वरक आदि दे रहे है उनमें अच्छी तरह मिला लें. फिर खेत में पानी लगाएं व् खेत पानी से भरने के तुरंत बाद एकसार बुरकाव/छिड़काव करें.अगर फव्वारा सिंचाई साधन हों तो तो जितना भी क्षेत्र फव्वारे कवर रहे हो उतने क्षेत्र में उपरोक्त मिश्रण डाल  दें व तुरंत फव्वारे चालू कर दें. इतने समय तक चलाये कि  उत्पाद अच्छी तरह घुलकर भूमि में चले जाएँ.

 


 

 

बिजाई के लगभग 50-60 दिन बाद:-

उत्पाद- कमाल -क्लैंप

मात्रा- ४ से ६ किलोग्राम प्रति एकड़. विधि क्लैंप को सम मात्रा में सूखे रेत के साथ मिलाकर बारीक व् भुरभुरा कर लें.फिर जो भी उर्वरक आदि दे रहे है उनमें अच्छी तरह मिला लें. फिर खेत में पानी लगाएं व् खेत पानी से भरने के तुरंत बाद एकसार बुरकाव/छिड़काव करें.अगर फव्वारा सिंचाई साधन हों तो तो जितना भी क्षेत्र फव्वारे कवर रहे हो उतने क्षेत्र में उपरोक्त मिश्रण डाल  दें व तुरंत फव्वारे चालू कर दें. इतने समय तक चलाये कि  उत्पाद अच्छी तरह घुलकर भूमि में चले जाएँ.

यह समय बेहद महत्व पूर्ण होता है. लगभग सभी फसलों में दाना बनने की अवस्था का समय होता है. [फिर भी फसलों के जीवनचक्र व् दाना बनने/दूध की अवस्था/दाना परिपक्व होने से पूर्व की स्थिति जाँच लें ] इस समय क्लैंप का उपयोग बेहद लाभदायक होता है. इस समय पौधे को खुराक चाहिए ताकि दाना स्वस्थ,वजनदार व् उत्तम क्वालिटी का मिले। क्लैंप भूमि में मौजूद पोषक तत्वों को सक्रिय कर देता है,अगर भूमि/फसल में कोई कीट या रोग की शंका है तो उसका भी समाधान हो जाता है. निश्चित ही पैदावार में वृद्धि होती है.


प्रणीय छिड़काव- कीटों,रोगों आदि से सुरक्षा कवच का निर्माण होता है.तथा पत्तों में वातावरण से पोषण ग्रहण करने की शक्ति का विकास भी होता है. पौधों में कीटो व् रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है.

उत्पाद- कृषिको-वोल्गा  {KHL-WOLGA [K-55]} + कमाल-505, कनिपर

मात्रा– वोल्गा 3 से 4 मिलीलीटर व कमाल-505 2 से 3 मिलीलीटर,कनिपर [KAMAAL-505-KNIPER] 1 से 2 मिलिटर  प्रति लीटर पानी के साथ.

विशेष– ध्यान रखें की उपरोक्त उत्पादों को सीधे स्प्रे पम्प में न डालें,बल्कि एक कप में तीनों उत्पादों की वांछित मात्रा लेकर खूब अच्छी तरह हिलाकर मिलाये,फिर स्प्रे पम्प के टैंक को आधा पानी से भरें व तैयार मिश्रण डालें. कोशिश करें की तेज धूप  या ओस के समय प्रयोग न करें. अगर कीटों का आक्रमण ज्यादा हो तो साथ में कोई भी विशेषज्ञ द्वारा सुझाया गया रासायनिक उत्पाद भी मिला सकते हैं.रासायनिक  उत्पाद की सुझाई गई मात्रा को लगभग आधी कर लें.  ताकि कीटों पर तुरंत नियंत्रण सम्भव हो सके. हमारे उत्पादों के प्रयोग से अधिक समय तक पौधों में प्रतिरोधक क्षमता विद्यमान रहती है.


अन्त्तिम उपचार- दाना बन जाने के उपरांत- यह समय बेहद कीमती होता है,दानों की गुणवत्ता,साइज वजन में  वृद्धि हेतु सिंचाई के साथ कमाल-क्लैंप का परयो करे. मात्रा- ४ किलोग्राम प्रति एकड. किलो सूखे रेत में मिलाकर पानी लगाने के तुरंत बाद एकसार बुरकाव/छिड़काव करें,ओस या तेज धूप में प्रयोग ना करें.

प्रणीय छिड़काव- कीटों,रोगों आदि से सुरक्षा कवच का निर्माण होता है.तथा पत्तों में वातावरण से पोषण ग्रहण करने की शक्ति का विकास भी होता है. पौधों में कीटो व् रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है.इस अवस्था में स्प्रे/छिड़काव करने से दानो की गुणवत्ता में सुधर होता है,दानों का वजन बढ़ने से पैदावार में भी वृद्धि होती है,साथ ही दानों का रस चूसने वाले कीटों या मौसम की वजह से हुए फफूंदी आदि रोगों से भी सुरक्षा मिलती है.

उत्पाद- कृषिको-वोल्गा  {KHL-WOLGA [K-55]} + kamaal-505-कनिपर

मात्रा– वोल्गा 3 से 4 मिलीलीटर + कनिपर [KAMAAL-505-KNIPER] 1 से 2 मिलिटर  प्रति लीटर पानी के साथ.

विशेष– ध्यान रखें की उपरोक्त उत्पादों को सीधे स्प्रे पम्प में न डालें,बल्कि एक कप में तीनों उत्पादों की वांछित मात्रा लेकर खूब अच्छी तरह हिलाकर मिलाये,फिर स्प्रे पम्प के टैंक को आधा पानी से भरें व तैयार मिश्रण डालें. कोशिश करें की तेज धूप  या ओस के समय प्रयोग न करें. अगर कीटों का आक्रमण ज्यादा हो तो साथ में कोई भी विशेषज्ञ द्वारा सुझाया गया रासायनिक उत्पाद भी मिला सकते हैं.रासायनिक  उत्पाद की सुझाई गई मात्रा को लगभग आधी कर लें.  ताकि कीटों पर तुरंत नियंत्रण सम्भव हो सके. हमारे उत्पादों के प्रयोग से अधिक समय तक पौधों में प्रतिरोधक क्षमता विद्यमान रहती है.

बागवानों के लिए हमारे प्रयास :-
आज का किसान आम फसलों से सब्जियों और बागवानी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. परन्तु बाग़ लगाने,देखभाल करने आदि पर खर्च बहुत आ रहा है. कई समस्याएँ भयंकर रूप ले चुकी हैं. बागवानों को अपने बाग़ बचाने के लिए अनाप शनाप खर्च करना पड़ रहा है. बहुत सारे स्वघोषित विशेषज्ञ पनप चुके है,जो बागवानों को कई तरह की दवाइयां सुझाते हैं,उनका मकसद सिर्फ अपनी दवाई,उत्पाद बेचकर मोटा मुनाफा कमाना भर ही है,बाग़ बचें या न बचें उनकी बला से. साथ ही उन्होंने बिना जरूरत के खतरनाक जहर बेच कर भूमि,पानी को जहरीला बना दिया है. भूमि निरंतर कमजोर हो रही है.साथ ही फलों में कई खतरनाक जहर पहुंच रहें हैं जो आम उपभोक्ता को बीमार कर रहे हैं.
इतने महंगे ,जहरीले उत्पाद प्रयोग करने पर भी बागों के पौधे सूख रहे हैं,पत्तों पर कई बीमारियां,कीट आक्रमण कर रहे हैं,फ्रूट ड्रॉपिंग,छोटा साइज,बेस्वाद व् निम्न क्वालिटी के फल मिल रहे हैं. कृषिको ने 2012 में बागवानों के निमंत्रण पर इस दिशा में काम शुरू किया.लम्बे समय तक शोध किये तो नतीजा यह निकला कि छोटी सी समस्या को धन कमाने के लालच में लोगों ने विकट रूप दे दिया.
लेकिन हमनें सस्ता,सुगम ,सुरक्षित समाधान ढूंढ कर दिया. मुख्य समस्या पेड़ सूखने की थी,जड़ की समस्याएँ भी थीं.पर ये सब भूमि की समस्या थी.साथ ही पौधे नर्सरी से ही रोग लेकर आये थे. हमने नर्सरी वालों को साथ जोड़ा,समझाया,साथ ही किसान को लगे हुए बागों में हर समस्या का समाधान भी दे दिया. कुछ ही दिनों में पौधे सूखने की समस्या जड़ से खत्म हो गई. फ्रूट ड्रॉपिंग न के बराबर रह गई. फल भी उत्तम क्वालिटी के मिले,स्वाद,वजन भी बेहतर हुआ.साथ ही फल की स्टोरेज अवधि भी बढ़ गई. किन्नू,आड़ू,अमरुद,अनार,सेब,चीकू आदि सभी पर बहुत अच्छे परिणाम मिल रहे हैं. आज बागवान स्वयं हमारे उत्पादों का प्रचार प्रसार कर रहे हैं. बागवानों को पौधे बेचने वाली नर्सरियां भी हमसे मिलकर काम करने लगी हैं.

पौधों को सूखने से बचाने के लिए सबसे उत्तम तरीका है मृदा का समुचित उपचार. क्योंकि भूमि में कई तरह के रोगाणु,विषाणु,कीटों के लार्वा आदि मौजूद होते हैं जो बाद में पौधों को बहुत नुकसान पहुंचते हैं तथा कीटनाशियों आदि के खर्च के बावजूद भी उपचार नहीं हो पाता,इस तरह खर्च बढ़ जाता है व पैदावार में भी कमी आती है साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता पर भी विपरीत असर पड़ता है. अतैव भूमि का उपचार अवश्य करें.ऐसा करने से मृदा व् जड़ों की लगभग सभी समस्यांओ का उपचार हो जाता है.
हमारे उत्पाद मृदा उपचार हेतु बहुत सफल पाए गए हैं. यह न केवल भू-जनित समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायक हैं,पौधों की जड़ों के रोगों आदि का त्वरित उपचार होता है,न केवल जड़ों का तेजी से विकास आरम्भ होता है.अपितु भूमि में मौजूद पोषक तत्वों को भी घुलनशील अवस्था में ले आते है,इससे सभी निष्क्रिय तत्व पौधे आसानी से ग्रहण करने में सक्षम हो जाते हैं. भूमि में जैविक प्रक्रिया आरम्भ होने से मिटटी की उर्वरा शक्ति में भी उत्तरोत्तर वृद्धि होती है.इससे पौधे की जड़ों का फैलाव अधिक होता है जड़ें गहराई तक जाकर अपने लिए मृदा में उपलब्ध पोषक तत्व ग्रहण करने में सक्षम होते हैं.
उपचार-
उत्पादों का नाम- कमाल–क्लैंप व कमाल-५०५
मात्रा – एक एकड़ बाग़ हेतु ८ किलो कमाल-क्लैंप व एक लीटर कमाल-५०५. { नए या पुराने सभी बागों के लिए यही मात्रा उपयुक्त है }
विधि- दोनों उत्पादों को समान मात्रा में सूखे रेत में मिलाकर खुश्क कर लें. अगर गोबर की अच्छी सड़ी गली खाद उपलब्ध हो तो लगभग ५० किलो गोबर की खाद में उपरोक्त मिश्रण मिलाकर प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढकें,छाया में ही रहने दें. तीन दिन उपरांत इस तैयार मिश्रण को जितनी खाद आपके पास खेत में डालने के लिए उपलब्ध है उसमे अच्छी तरह मिलाएं.फिर पानी लगाएं. जब पूरे खेत में पानी लग जाये तो इस मिश्रण का एकसार बुरकाव करें.
अगर आप रासायनिक खाद जैसे DAP ,NPK आदि उर्वरक दे रहे हों तो उपरोक्त विधि से इनके साथ भी प्रयोग कर सकते हैं.
{ खेत की जुताई सम्भव हो तो,जुताई से पूर्व इस मिश्रण को उपलब्ध खाद में मिलाकर सारे खेत में डाले,फिर जुताई करके,पानी लगा दें,इस तरीके से जल्द व अधिक परिणाम पाए गए हैं.}
ड्रिप सिंचाई के साथ:- कमाल-क्लैंप को १०० लीटर पानी में भिगोये,तीन दिन तक.बीच बीच में डंडे से हिलाते रहे. फिर छानकर ड्रिप सिस्टम वाले ड्रम में १५० से २०० लीटर पानी में मिलाएं व् इसके बाद कमाल-५०५ मिलायें,अच्छी मिलाकर ड्रिप चलायें.

 


Use, dose, products guidlines

For all crops,vegetables,Gardening,Poly Houses etc

Seed treatment– Seed treatment is very important; it provides protection from seed-borne diseases as well as the accumulation of seeds is increased quickly.

For this, our product Kamaal-505-Kesari has been found to be very useful. Thousands of farmers are satisfied with it. Only 200 grams of KESARI is enough for 50 kg of seed, as rice,wheate,groundnut and same seeds.

Method: First dissolve 200 grams of KESARI  well in a plastic vessel with one liter of water. Then make the seeds pile on a plastic sheet or paved floor. Then put the prepared solution on the pile of its seeds and mix well. Mix, when the whole solution has climbed on the seed like a layer, cover the seed well with a black plastic sheet, allow it to remain covered for only 20,25 minutes, then dry in the shade, make sure that the seed does not get sunshine. When it is well dry, sow, if possible, do the sowing in the evening, avoid sowing in the hot weather, bright sunshine, hot weather.


Soil  treatment is of special importance before sowing of any crop. Because there are many types of germs, viruses, insect larvae, etc. present in the soil, which later cause a lot of damage to the crops and in spite of the expenses of pesticides, etc., the treatment is not done, in this way the expenditure increases and the yield is also reduced and the quality of the product is adversely affected. So, make sure to treat the land. Our products have been found to be very successful for soil treatment. It is not only helpful in getting rid of the problems caused by the soil, but also brings the nutrients present in the soil to the soluble state, it makes all the inactive elements useful for the crops. The fertility of the soil also increases progressively due to the introduction of biological process in the soil.

Products – Kamaal-Clamp and Kamaal-505.

Quantity- Kamaal-clamp 0.4 kg, and Kamaal-505 one liter.

Method- At the time of the last ploughing before sowing. Mix both the products first in finely dried sand and brittle them. Then whatever fertilizers you are using, such as DAP,organic manure etc., mix well, then do broadcast all over the field and plough deeply,and sow.

About 20,25 days of sowing is very important, it is the time of development of the roots and plant growth. If the right dose, treatment is not available at this time, then the plants do not develop properly and the yield decreases.

At this time, we use fertilizers like nitrogen, but it has been found that despite giving a lot of fertilizers, etc., there is no complete development. This is because the natural system of converting fertilizers etc. into supplements in the land is weak i.e. organic in the soil. There is no process that can convert fertilizers into supplements and the roots are not able to take the dose nor the plants get nourishment.

That is why, after thorough research, on the basis of Ayurvedic principles from natural herbs, such unique products have been created by KRISHICO which are capable of solving this problem. These products not only activate the nutrients present in the land, but all the fertilizers [organic or inorganic] you give mixed with our products are easily absorbed by all the plants. Also, if there is any pest or disease present in the land, they are alsoThe solution gets.  The biological process in the soil develops rapidly, making the roots deeper and able to absorb highly, available nutrients.

The land becomes very soft, the ability to absorb water and hold water develops. The movement of water and air in the ground is easy. That is, the process of life in the land develops. The specialty of our products is that you can also use them with organic, synthetic/ chemical products. Whatever fertilizers etc. you use in combination with our products, their functionality increases rapidly. Due to this, the cost of fertilizers, etc., would have been progressively reduced.

 Products – Kamaal – Clamp, Dose – 4 to 6 kg per acre.

Method – Mix Kamaal- clamp with an equal amount of dry sand and finely and brittle it. Then mix well with whatever fertilizers etc. you are giving. Then put water in the field and immediately after filling the field with water, broadcast equally to whole field. If the fountain is an irrigation tool, then put/broadcast the above mixture in any area that is covered by the fountains and immediately turn on the fountains. Run for so long that the products dissolve well and go into the ground.


Foliar spraying – Protective shields are created from pests, diseases, etc., and the leaves also develop the power to receive nutrition from the environment. Plants develop the ability to fight insects and diseases.

Products– KHL-WOLGA [K-55]} + Kamaal-505-Kniper

Quantity– Wolga 3 to 4 ml and Kamaal-505 2 to 3 ml, Kniper[KAMAAL-505-KNIPER] with 1 to 2 ml per liter of water.

Special- Keep in mind that do not put the above products directly into the spray pump, but take the desired amount of all the products in a cup and mix well, then fill the tank of the spray pump with half water and add the prepared mixture,fill tank after adding mixture. Try not to use in times of bright sunlight or dew. If the insect attack is more, then any expert has been suggested any chemical products can also be added. Reduce the suggested amount of chemical product to about half.  So that it is possible to control the pests immediately. The use of our products keeps the immunity in plants for a longer period of time.

 

The ultimate treatment – after the grain is made – this time is very precious,to make  the quality of the grains, the size,weight of grains with best quality  to get much price from customer.

 Quantity– 4 kg per acre. Add to kg of dry sand immediately after applying water, broadcast equally to whole field, do not use in dew or bright sun.

Time of Use- About last irrigation


ProductNatural Plant Food

Natural Plant Food has been developed after research on the special demand of our urban friends. These days the people living in the cities want that the small garden of their house should be green. Many types of products being sold by the market are not yielding any results. Rather, the people of the market sell them poison based products, which do more harm than profit, and it is also dangerous to keep in the house.

We understood their problem and made them an effective product using completely safe botanicals and herbs. Which was appreciated by our customers themselves.

Usage- Only 15,20 grams quantity has to be given two or three times in a month in a square feet or a simple size pot. Due to this, the soil of the pot remains alive, due to the full activation of the nutrients present in the soil and available in our product, the plants get the desired growth, the leaves are dense, healthy and flowers etc. also come of very good quality. If a fruit plant is planted, then a little more quantity can be given in it. Due to this the fruits also become healthy and tasty.


Our Efforts for Gardening

Proper soil treatment is the best way to prevent plants from drying out. Because many types of pathogens, viruses, insect larvae etc. are present in the land, which later cause a lot of damage to the plants and despite the cost of insecticides etc. Along with this, the quality of the product also gets adversely affected. Therefore, the land must be treated. By doing this, almost all the problems of soil and roots are cured.
Our products have been found very successful for soil treatment. It is not only helpful in getting rid of land-borne problems, there is a quick treatment of diseases of plant roots etc. Not only does the rapid growth of the roots start. But it also brings the nutrients present in the soil in a soluble state. Due to this, all the inactive elements are able to be absorbed by the plants easily. Due to the beginning of the biological process in the soil, the fertility of the soil also increases progressively. Due to this, the spread of the roots of the plant is more, the roots are able to go deep and absorb the nutrients available in the soil for themselves.
the treatment-
Product NameKamaal–Clamp & Kamaal-505
Quantity – 8 kg Kamaal-clamp and one liter Kamaal-505 for one acre orchard. { This quantity is suitable for all gardens new or old }
Method– Mix both the products in equal quantity of dry sand and dry it. If well-rotted alley manure of cow dung is available, then mix the above mixture in about 50 kg of cow dung, cover it well with a plastic sheet, leave it in the shade. After three days, mix this prepared mixture well with the amount of manure available to you in the field. Then apply water. When the entire field is covered with water, sprinkle/broadcast this mixture evenly.
If you are giving chemical fertilizers like DAP, NPK etc., then you can also use them with the above method.
{If plowing the field is possible, before plowing, mix this mixture with the available manure and put it in the whole field, then after plowing, apply water, in this way faster and more results have been found.}
With Drip Irrigation:- Soak the Kamaal-clamp in 50 liters of water, for three days. Stirring it with a stick in between. Then filter it and mix it in 150 to 200 liters of water in a drum with drip system and after that add Kamaal-505, mix well and run the drip.

Thousands of products found in the world, which destroy the fertility of the land, but the byproducts that improve the health of the land, start a new life in the soil are the products of Kamaal series only.

 

 

Krishico was founded in 2004 by renowned farmer scientist, globally awarded, record holder

Ishwar Singh Kundu after many years of hard work and research. Their products are entirely based on the principles of Indian Ayurveda. Who have been successful in solving many kinds of problems in any crop, vegetable, horticulture.

The Punjab Agricultural University, Ludhiana, also tested its produce for two years and recorded an increase in yields from 6 to 18%.

http://khlagro.in/wp-content/uploads/2014/10/Evaluation-Report-By-Punjab-Agricultural-UniversityLudhianaPunjab.pdf